साइबर अपराध अनुसंधान के विकास का मानचित्रण: एक वैश्विक साइंटोमेट्रिक विश्लेषण

Authors

  • Nitin Sharma CSIR-National Institute of Science Communication and Policy Research, New Delhi, India; Academy of Scientific and Innovative Research, Ghaziabad, Uttar Pradesh, India.
  • ANU AcSIR-CSIR-NIScPR
  • NK Prasanna CSIR-National Institute of Science Communication and Policy Research, New Delhi, India; Academy of Scientific and Innovative Research, Ghaziabad, Uttar Pradesh, India.

DOI:

https://doi.org/10.56042/bvaap.v33i2.20894

Abstract

निरंतर डिजिटल परिवर्तन के युग में, साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा महत्वपूर्ण शोध का विषय बन गए हैं क्योंकि सूचना प्रणाली, नेटवर्क और डेटा अखंडता के लिए खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। इस शोध में, 2020 से 2024 तक प्रकाशित लेखों का साइंटोमेट्रिक और बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण किया गया है, जो "साइबर अपराध," "साइबर सुरक्षा," और "नेटवर्क सुरक्षा" कीवर्ड द्वारा वेब ऑफ़ साइंस डेटाबेस (Web of Science) से एकत्र किये गए है। कुल 274 रिकॉर्ड प्राप्त हुए, और डेटा को 5 वर्षों  के  लिए छाँटने के बाद, अंतिम डेटासेट में 149 दस्तावेज़ प्राप्त हुए। कीवर्ड सह-घटना मानचित्रण, स्रोतों के ग्रंथ सूची युग्मन और देशों के बीच सह-लेखन के लिए VOSviewer सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया गया है। इस विश्लेषण से पता चला कि साइबर खतरों के लिए तकनीकी समाधानों को लक्षित करने वाले शोधों का रुझान मजबूत हैं, जो की विशेष रूप से मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और व्यवहार विश्लेषण का संदर्भ देते हैं। इंग्लैंड, यूएसए और भारत की पहचान अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग के प्रमुख केंद्रों के रूप में की गई। IEEE एक्सेस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी तकनीकी पत्रिकाओं को प्रकाशन का प्राथमिक स्रोत पाया गया। इसके विपरीत, ब्लॉकचेन, साइबर ग्रूमिंग और डीपफेक जैसे उभरते रुझानों को भी शोध में परिवर्तन के क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है। विश्लेषण से यह पता चलता है कि साइबर अपराध का आकलन करने वाले शोध बहु-विषयक और वैश्विक है और जटिल साइबर सुरक्षा मुद्दों को हल करने के लिए वैश्विक सहयोग का संकेत देते है।

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Published

2026-01-15

How to Cite

साइबर अपराध अनुसंधान के विकास का मानचित्रण: एक वैश्विक साइंटोमेट्रिक विश्लेषण. (2026). Bharatiya Vaigyanik Evam Audyogik Anusandhan Patrika (BVAAP), 33(2), 118-123. https://doi.org/10.56042/bvaap.v33i2.20894