[1]
“वसुधैव कुटुंबकम्: पर्यावरणीय संपोषणीयता की भारतीय अंतर्दृष्टि”, BVAAP, vol. 32, no. 1, pp. 32–36, Jul. 2025, doi: 10.56042/bvaap.v32i1.12184.